हामिद
ईद के मुबारक दिन
याद आई प्रेमचंद के हामिद की मुझे,
जिसने खरीदा था पिछली ईद में
एक चिमटा दादी के लिए,
पहुँच गया उसको ढूडंते ईदगाह के बाज़ार में,
रोक ना पाया अपने आंसुओं को,
जब देखा उसके हाथ में
एक मास्क, अपनी प्यारी दादी के लिए I
- डॉ. शोभा भारद्वाज